उत्तर प्रदेश के परम वीर चक्र हीरो जिनके शौर्य को देश सलाम करता है

उत्तर प्रदेश की धरती ने जहां देश को बड़े- बड़े राजिनीतिज्ञ, नेता, कवि, लेखक, योगी, संत और स्वतत्न्त्रता सेनानी प्रदान किए हैं, वहीं इस धरती ने देश को कई वीर सैनिक भी प्रदान किए हैं। ऐसे ही चार परम वीर चक्र से सम्मान्नित योद्धाओं के बारे में हम आपको आज बताने जा रहे हैं।

0
216
param-vir-chakra
param-vir-chakra

उत्तर प्रदेश की धरती ने जहां देश को बड़े- बड़े राजिनीतिज्ञ, नेता, कवि, लेखक, योगी, संत और स्वतत्न्त्रता सेनानी प्रदान किए हैं, वहीं इस धरती ने देश को कई वीर सैनिक भी प्रदान किए हैं। ऐसे ही चार परम वीर चक्र से सम्मान्नित योद्धाओं के बारे में हम आपको आज बताने जा रहे हैं।

परम वीर चक्र भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है, जिसे युद्ध के दौरान वीरता के विशिष्ट कार्यों को प्रदर्शित करने के लिए दिया जाता है।

कंपनी क्वार्टरमास्टर हवलदार अब्दुल हमीद

Param Vir Chakra Abdul Hamid
Param Vir Chakra Abdul Hamid – 1 जुलाई 1933 – 10 सितंबर 1965

(1 जुलाई 1933 – 10 सितंबर 1965), एक भारतीय सेना के सिपाही थे, जिन्हें मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च सैन्य अलंकरण, परम वीर चक्र, 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनके कार्यों के लिए मिला।

9-10 सितंबर 1965 को असाल उत्तर की लड़ाई में, हामिद ने छह पाकिस्तानी टैंकों को नष्ट कर दिया और सातवें के साथ लड़ाई के दौरान वो मारे गए।

लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे

Param Vir Chakra Manoj Kumar Pandey
Param Vir Chakra Manoj Kumar Pandey – 25 जून 1975 – 3 जुलाई 1999

(25 जून 1975 – 3 जुलाई 1999), 11 गोरखा राइफल्स के एक भारतीय सेना अधिकारी थे, जिन्हें मरणोपरांत उनके साहस के लिए भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान वे कारगिल के बटालिक सेक्टर में जुबार टॉप, खालुबर हिल्स पर हमले के दौरान मारे गए थे। उनके साहसिक कार्यों के कारण उन्हें “बटालिक के नायक” के रूप में जाना जाता है।

लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे ने ऑपरेशन विजय के दौरान अदम्य साहस का परिचय देते हुए बटालिक में हुई लड़ाई के दौरान दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया और घुसपैठियों को वापस जाने के लिए मजबूर किया।

नाइक जदुनाथ सिंह

param-vir-chakra-naik-jadunath-singh
Param Vir Chakra Naik Jadunath Singh – 21 नवंबर 1916 – 6 फरवरी 1948

(21 नवंबर 1916 – 6 फरवरी 1948) एक भारतीय सेना का जवान था, जिसे मरणोपरांत परमवीर चक्र, 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान लड़ाई में अपने साहसिक कार्यों के लिए भारत की सर्वोच्च सैन्य सम्मान से सम्मानित किया गया था।

उन्होंने 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भाग लिया। 6 फरवरी 1948 को नौशहरा के उत्तर में ताइन धार में सिंह ने नौ सदस्यीय फारवर्ड सेक्शन पोस्ट की कमान संभाली। सिंह ने पाकिस्तानी सेनाओं को आगे बढ़ने के तीन प्रयासों के खिलाफ अपने लोगों का नेतृत्व किया। दूसरे हमले के दौरान वे घायल हो गए थे। स्टन गन के साथ सशस्त्र, उन्होंने अकेले ही हमलावरों को वापस जाने पर मजबूर किया। ऐसा करते हुए वे शहीद हो गए। शाहजहाँपुर में एक स्पोर्ट्स स्टेडियम और एक कच्चे तेल के टैंकर उनके नाम पर हैं।

सूबेदार मेजर योगेन्द्र सिंह यादव

Param Vir Chakra-Yogendra Yadav
Param Vir Chakra-Yogendra Yadav

भारतीय सेना के एक जूनियर कमीशन अधिकारी (JCO) हैं, जिन्हें कारगिल युद्ध के दौरान 4 जुलाई 1999 की कार्रवाई के लिए सर्वोच्च भारतीय सैन्य सम्मान, परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। जब 19 साल की आयु में उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया तो यह सम्मान पाने वाले वे देश के सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे।

18 ग्रेनेडियर्स में भर्ती हुए यादव, कमांडो पलटन ‘घटक’ का हिस्सा थे, जिसने 4 जुलाई 1999 की सुबह टाइगर हिल पर तीन बंकरों पर कब्जा करने का काम किया। इस लड़ाई में कुल मिलाकर यादव को 14 गोलियां लगीं और उन्होंने टाइगर हिल्स पर कब्जा करने में प्रमुख भूमिका निभाई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here