कुम्भ मेला – प्रयागराज २०१९

हर १२ वर्षों के अंतराल में पूर्ण कुम्भ का आयोजन होता है और पूर्ण कुम्भ के छ: वर्ष बाद अर्ध-कुंभ का योग बनता है.

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देवानां द्वादशाहोभिर्मर्त्यै द्वार्दशवत्सरै:।
जायन्ते कुम्भपर्वाणि तथा द्वादश संख्यया:।।

देवासुर संग्राम के दौरान सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति अमृत कलश की रक्षा कर रहे थें. इन तीनों ग्रहों का विशेष संयोग होने पर कुंभ योग होता है.

भव्यता, दिव्यता और आध्यात्म का प्रतिक कुम्भ पर्व मकर संक्रांति वाले दिन शुरू होता है. हिन्दू आस्था का यह पर्व, इस साल, 15 जनवरी 2019 से प्रयागराज (पहले इलाहाबाद) में शुरू होने जा रहा है.

हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक – ये वे चार स्थान हैं जहाँ ग्रह-राशियों के विशेष संयोग पर 12 वर्षों में कुम्भ लगता है. नासिक में गोदावरी तट पर, हरिद्वार में गंगा किनारे, उज्जैन में शिप्रा तट पर और प्रयाग में (गंगा, यमुना व सरस्वती) संगम पर इस मेले का आयोजन किया जाता है.


हर १२ वर्षों के अंतराल में पूर्ण कुम्भ का आयोजन होता है और पूर्ण कुम्भ के छ: वर्ष बाद अर्ध-कुंभ का योग बनता है.

कुम्भ का आधार

kumbh mela 2019

ज्योतिष गणना के आधार पर कुम्भ का आयोजन निम्न बिन्दुओं पर निर्भर है:

  • बृहस्पति के कुम्भ राशि में तथा सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने पर हरिद्वार में कुम्भ का योग बनता है.
  • जब बृहस्पति मेष राशि में और सूर्य व चन्द्रमा मकर राशि में होते हैं तब प्रयागराज में कुम्भ का आयोजन होता है।
  • जब बृहस्पति और सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करते हैं तब नासिक में कुम्भ लगता है.
  • बृहस्पति यदि सिंह राशि में तथा सूर्य मेष राशि में हो तो उज्जैन में कुम्भ आयोजित किया जाता है.

कुम्भ का महत्व

kumbh mela history

ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन कुम्भ स्नान करने से मनुष्य अपने पापों से मुक्ति प्राप्त कर सहजता से ही स्वर्ग की प्राप्ति कर लेता है. कहा जाता है कि इस दिन उच्च लोकों के द्वार खुलते हैं और इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से आत्मा को न केवल जन्म-मृत्यु के कुचक्र से मुक्ति मिलती है बल्कि उच्च लोकों की प्राप्ति भी सरलता से हो जाती है. कुम्भ में स्नान करने को स्वर्ग के दर्शन करने के समान माना जाता है.

दुनिया में शायद ही कहीं और इतने बड़े पैमाने पर किसी धार्मिक मेले का आयोजन होता हो. यही कारण है कि इस मेले को देखने-समझने के लिए विदेशों से भी सैकड़ों लोग आते हैं. यदि हम यह कहें कि कुम्भ संस्कृतियों का संयोजन और अध्यात्मिक चेतना का जागरण है, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी.

जब पवित्र नदी के चारों ओर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, तो उस दृश्य का वर्णन शब्दों में करना मुश्किल हो जाता है. ऐसा लगता है मानो भक्ति अपने चरम पर है और हर भक्त इस भक्ति की गंगा में डूब जाना चाहता है.

कहानी कुंभ की

kumbh mela 2019

जितना भव्य यह पर्व है उतनी ही दिलचस्प कुम्भ से जुड़ी कहानी है. कहा जाता है कि देवासुर संग्राम के पश्चात होने वाले समुन्द्र मंथन में चौदह रत्नों की प्राप्ति हुई जिनमें अमृत भी शामिल था. बाकी तेरह रत्न तो देवताओं और दानवों ने आपस में बाँट लिए, परन्तु जब, अंत में, समंदर से भगवान् धन्वन्तरी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए तो एक बार पुनः देवताओं और दानवों में अमृत को लाकर झगड़ा आरम्भ हो गया. इसी बीच देवराज इंद्र का पुत्र, जयंत, अमृत कलश को लेकर भाग गया.

जब जयंत आकाश मार्ग से अमृत कलश लेकर भाग रहा था तब अमृत की कुछ बूंदे पृथ्वी पर चार स्थानों पर गिरी. ये चार स्थान थे – हरिद्वार, नासिक, उजैन और प्रयागराज. यही कारण है कि कालान्तर में इन्हीं चारों स्थानों पर कुम्भ का आयोजन होता है. कहा जाता है कि इन चार जगहों में से जिस स्थान पर कुम्भ का आयोजन होने वाला होता है, उस स्थान का पानी अमृत के समान हो जाता है.

२०१९ कुम्भ की स्नान की तिथियाँ

kumbh mela 2019

कुंभ के कर्मकाण्डों में से सर्वाधिक महत्वपूर्ण कर्मकांड है कुम्भ स्नान. पूरे पर्व के दौरान विभिन्न अखाड़ों के सदस्य, साधू-संत एवं करोड़ों भक्त नदी के पवित्र जल में स्नान कर पुण्य लाभ करते हैं. इस दौरान कुछ ख़ास दिन भी होते हैं जिन्हें स्नान के लिए विशेष तौर पर शुभ माना जाता है. इस वर्ष पड़ने वाले कुम्भ के दौरान विशेष स्नान की तिथियाँ इस प्रकार हैं:


१) मकर संक्रांति – 15 जनवरी, 2019 को जिस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे, उस दिन से प्रारम्भ होगा कुम्भ. यह दिन बहुत पवित्र माना जाता है क्योंकि इस दिन से सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाते हैं.

२) पौष पूर्णिमा -21 जनवरी, 2019 को होगी पौष मॉस की पूर्णिमा और स्नान के लिए यह दिन भी बहुत शुभ माना गया है.

३) मौनी अमावस्या – 4 फरवरी, 2019 को मौनी अमावस्या वाले दिन पवित्र स्नान के लिए लगने वाली भीड़ सर्वाधिक होने की उम्मीद है क्योंकि कुम्भ स्नान के लिए मौनी अमावस्या का दिन सबसे अधिक अनुकूल माना जाता है.

४) बसंत पंचमी – यानी कि वह दिन जब विद्या की देवी माँ सरस्वती का धरती पर अवतरण हुआ था. 10 फरवरी, 2019 को मनायी जायेगी बसंत पंचमी और स्नान की चाह रखने वालों के लिए यह दिन भी बहुत ख़ास और पवित्र होगा.

५) माघी पूर्णिमा – 19 फरवरी, 2019 को पड़ने वाली माघी पूर्णिमा का दिन भी स्नान के लिए बहुत शुभ दिन है.

६) महाशिवरात्रि – 4 मार्च, 2019 को मनाई जाएगी शिवरात्री. देवों के देव महादेव और माता पार्वती के विवाह से जुड़ा यह दिन स्नान के लिए अंतिम दिन होगा. शायद ही कोई ऐसा भक्त होगा जो इस दिन स्नान से खुद को वंचित रखना चाहेगा.

कुम्भ से जुड़े रीति-रिवाज़

कुम्भ एक ऐसा महापर्व है जहाँ आपको धर्म के कई रूप देखने को मिलते हैं. कुम्भ के मेले में हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति के विभिन्न रंग-रूपों की इन्द्रधनुषी छटा देखने को मिलती है.

शाही स्नान और दान

शाही स्नान कुंभ मेले में विशिष्ट स्थान रखता है. सर्वप्रथम शाही स्नान का अधिकार अखाड़े के साधुओं के पास होता है. स्नान से पहले विभिन्न अखाड़ों द्वारा जुलुस और शोभा-यात्रा निकाली जाती है. आम जन मानस इन साधुओं के स्नान के बाद ही स्नान कर सकते हैं. इसके लिए आम लोग भोर 3 बजे से ही कतार बद्ध हो अपनी बारी का इंतज़ार करते हैं.

कुम्भ के मेले में आपको नागा, अघोरी, शैव अखाड़ा से सम्बंधित साधु, वैष्णव अखाड़ा वाले साधु आदि कई तरह के साधुओं को करीब से देखने और जानने का मौका मिलता है. साधुओं को देखने और समझने के लिए कुम्भ से बढ़िया जगह नहीं हो सकती. स्नान के बाद लोग दान और पूजा जैसे धार्मिक कर्मों में भी भाग लेते हैं.

सत्संग , हवन इत्यादि

मेले के दौरान जगह-जगह आपको साधु- सन्यासी, अघोड़ी आदि हिंदू धर्म पर ज्ञान देते और सत्संग करते हुए मिले जाएंगे. धर्म को करीब से जानने-समझने का यह एक बेहतरीन मौका होता है. कई साधु, पंडित, विद्वानों का संगम स्थल होता है कुम्भ. इस दौरान कई भक्त और साधुगण हवन, होम, यज्ञ आदि का भी आयोजन करते आपको मिल जायेंगे.

लंगर

कुम्भ के दौरान लंगरों का भी जमकर आयोजन किया जाता है. इन लंगरों में आम आदमी से लेकर साधु-सन्यासियों तक-सबके लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था होती है.

अगला कुम्भ कब और कहाँ

कुम्भ का योग ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है. इसी ज्योतिषीय गणना के आधार पर अगला कुम्भ २०२२ में हरिद्वार में लगेगा. यह ५ फ़रवरी से शुरू होकर १ मार्च तक चलेगा. अगला महाकुंभ साल 2025 में लगेगा।

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