कुम्भ मेला प्रयागराज अक्षयवट दर्शन

अक्षयवट की महिमा को दर्शाता यह श्लोक पद्‌म पुराण से लिया गया है. इस श्लोक में अक्षयवट को तीर्थराज प्रयाग का छत्र कहा गया है.

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Akshayavat

छत्तेऽमितश्चामर चारुपाणी सितासिते यत्र सरिद्वरेण्ये।
अद्योवटश्छत्रमिवाति भाति स तीर्थ राजो जयति प्रयागः॥

अक्षयवट की महिमा को दर्शाता यह श्लोक पद्‌म पुराण से लिया गया है. इस श्लोक में अक्षयवट को तीर्थराज प्रयाग का छत्र कहा गया है.

तीर्थराज प्रयाग का एक अहम् धार्मिक स्थल है अक्षयवट. अक्षयवट का आशय है वह वृक्ष जिसका कि कभी नाश नहीं होता. ऐसी मान्यता है कि प्रलय के समय जब पूरी पृथ्वी जल मग्न हो जाती है तब भी बरगद का यह पेड़ हरा-भरा रहता है. स्वयं भगवान विष्णु इसके पत्ते पर बाल मुकुंद के रूप में वास करते हैं.

प्राचीन काल में अक्षयवट अपने विलक्षण चमत्कारों के लिए विशेष रूप से जाना जाता था. आज अक्षयवट एक किले के विशाल तहखाने में स्थित है.

कुम्भ मेला प्रयागराज में होंगे अक्षयवट का दर्शन

कुम्भ मेला २०१९ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्षयवट को खोलने का एलान कर दिया है और इसके बाद से ही सेना, मेला प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन ने मिलकर इस आशय की ओर काम करना शुरू कर दिया है. प्रशासन न सिर्फ यहाँ तक पहुँचने के इंतज़ाम पुख्ता करने में जुटा है बल्कि सुरक्षा के लिहाज़ से भी कड़ी व्यवस्था की जा रही है.

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अक्षयवट दर्शन के लिए करना होगा कुछ नियमों का पालन

अक्षयवट के दर्शन के लिए अपने पास पहचान पत्र रखना अनिवार्य होगा और बिना पहचान-पत्र के किले में प्रवेश निषिद्ध होगा. मेला प्रशासन और सेना के बीच हुई बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है कि कोई भी अराजक तत्व अक्षयवट तक न पहुँच पाए, इसके लिए पहचान पत्र अनिवार्य करना ज़रूरी है.इसके अलावा ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाली इस जगह के दर्शन के लिए मोबाइल और कैमरा ले जाने पर भी पाबंदी होगी. प्रशासन और सेना का मानना है कि सुरक्षा की दृष्टि से किले के भीतर की तस्वीरें सार्वजनिक होना सही नहीं रहेगा. मोबाइल और कैमरे पर प्रतिबंध लगाने का यही कारण है.

आइये, अब यह भी जान लेते हैं कि किन पहचान पत्र के आधार पर आपको अक्षयवट दर्शन की अनुमति मिल सकती है. तो बता दें, आधार कार्ड, पैन कार्ड, निर्वाचन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट आदि में से कोई भी एक अगर आपके पास हो तो आपको अक्षयवट दर्शन की अनुमति मिल जायेगी. साथ ही, श्रद्धालुओं के लिए यह जान लेना भी ज़रूरी है कि वो कोई भी बैग या अन्य सामान लेकर भीतर प्रवेश नहीं कर पायेंगे.

सुरक्षा के पुख्ते इंतज़ाम

हर प्रकार की गतिविधि पर नजर रखने के लिए सुरक्षा के पुख्ते इंतज़ाम किये जायेंगे. किले के अंदर जगह- जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और साथ ही सेना के जवानों को भी तैनात किया जायेगा.

अक्षयवट दर्शन को लेकर तारीखें तय नहीं

पाठकों को यह जान लेना भी ज़रूरी है कि अक्षयवट दर्शन की तारीखों का अभी ऐलान नहीं हुआ है. अभी यह भी तय नहीं किया जा सका है कि स्नान के दिन अक्षयवट खोला जाएगा या नहीं. सेना और प्रशासन के बीच इस निर्णय को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है और अंतिम निर्णय सेना की सहमती पर निर्भर करेगा.

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